- मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल समेत कई दावेदारों के बीच पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के पुत्र की सक्रियता ने बढ़ाई सियासी हलचल
चमोली : उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही भाजपा के भीतर टिकट को लेकर दावेदारियां तेज होने लगी हैं। चमोली जिले की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल समेत कई नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी की कर्णप्रयाग क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। अब सवाल उठने लगा है कि क्या मनीष खंडूड़ी भी 2027 में कर्णप्रयाग से भाजपा के टिकट के लिए दावेदारी कर सकते हैं?
फिलहाल इसे लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं है और न ही मनीष खंडूड़ी ने कर्णप्रयाग से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। बावजूद इसके उनकी क्षेत्र में सक्रियता को संभावित चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि वह कर्णप्रयाग से दावेदारी करते हैं तो भाजपा के भीतर पहले से मौजूद टिकट के समीकरण बदल सकते हैं।
सक्रियता से क्यों बढ़े कयास
मनीष खंडूड़ी लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें भाजपा प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया।
भाजपा में शामिल होने के बाद से मनीष खंडूड़ी संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों में नजर आते रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने चर्चाओं को और हवा दी है। क्षेत्र में उनकी मौजूदगी और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए अब पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि कहीं वह 2027 के लिए अपनी जमीन तो तैयार नहीं कर रहे हैं? हालांकि अभी इसे सिर्फ राजनीतिक कयास ही माना जा रहा है, लेकिन चुनावी वर्ष नजदीक आने के साथ किसी संभावित दावेदार की क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
पिता का राजनीतिक कद, बहन विधानसभा अध्यक्ष
मनीष खंडूड़ी के नाम की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी के पुत्र हैं। भुवन चंद्र खंडूड़ी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद के रूप में भी लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं, वहीं उनकी बहन ऋतु खंडूड़ी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं। ऐसे में खंडूड़ी परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि प्रदेश की राजनीति में मजबूत मानी जाती है। यदि मनीष खंडूड़ी विधानसभा चुनाव में उतरते हैं तो उनके नाम के साथ परिवार की राजनीतिक विरासत भी एक महत्वपूर्ण फेक्टर बन सकता है।
कांग्रेस से भाजपा तक का सफर भी बनेगा चर्चा का हिस्सा
मनीष खंडूड़ी का कांग्रेस से भाजपा तक का राजनीतिक सफर भी उनकी संभावित दावेदारी को अलग रंग देता है। 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद उन्होंने पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। अब यदि वह कर्णप्रयाग विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी करते हैं तो उनके सामने एक ओर भाजपा के पुराने और स्थानीय नेताओं का संगठनात्मक अनुभव होगा, वहीं दूसरी ओर लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव और खंडूड़ी परिवार की राजनीतिक पहचान उनके पक्ष में चर्चा का विषय बन सकती है।
अनिल नौटियाल समेत स्थानीय दावेदारों के बीच बढ़ेगी चुनौती
कर्णप्रयाग में भाजपा के मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल समेत कई नेता टिकट के लिए अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में मनीष खंडूड़ी का नाम संभावित दावेदार के रूप में चर्चा में आता है तो पार्टी के भीतर टिकट का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि संगठन स्थानीय दावेदारों की क्षेत्र में पकड़, संगठनात्मक सक्रियता और जीत की संभावना को किस तरह देखता है। मनीष खंडूड़ी के लिए भी चुनौती कम नहीं होगी। उन्हें खंडूड़ी परिवार की राजनीतिक विरासत और लोकसभा चुनाव के अनुभव को कर्णप्रयाग के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों तथा जमीनी जनसंपर्क में बदलना होगा।
फिलहाल कयास, आने वाले समय में तस्वीर होगी साफ
फिलहाल भाजपा की ओर से कर्णप्रयाग विधानसभा सीट के लिए किसी नाम पर आधिकारिक तौर पर चर्चा या घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में मनीष खंडूड़ी की संभावित दावेदारी को अभी कयासों से आगे नहीं माना जा सकता। लेकिन उनकी बढ़ती क्षेत्रीय सक्रियता ने टिकट की दौड़ में एक नया नाम जरूर जोड़ दिया है।
अब आने वाले महीनों में उनकी कर्णप्रयाग में राजनीतिक गतिविधियां कितनी बढ़ती हैं, यह देखने वाली बात होगी। यदि क्षेत्र में उनका जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता लगातार तेज होती है तो इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल इतना जरूर है कि मनीष खंडूड़ी के नाम की चर्चा ने कर्णप्रयाग भाजपा में टिकट के संभावित समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।