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संजीव के “मांजी मसाले” ने पहाड़ में जमाई धाक, कई जिलों तक पहुंचा कारोबार

by badhtauttarakhand
  • 26 साल शहर में गुजारे, गांव लौटकर खड़ा किया मसालों का कारोबार
  • कोरोना में कांडई लौटे संजीव बछेती ने शुरू की ‘मांजी मसाले’ यूनिट, अब पहाड़ी मसालों से अनाज-दालों तक पहुंचा कारोबार; आठ लोगों को मिला रोजगार

पौड़ी। पहाड़ से रोजगार की तलाश में युवाओं का शहरों की ओर पलायन आम कहानी है, लेकिन पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक के कांडई गांव निवासी संजीव बछेती ने इस कहानी को उलटने की कोशिश की है। दिल्ली-एनसीआर में करीब 26 साल बिताने के बाद कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में गांव लौटे संजीव ने दोबारा शहर जाने के बजाय यहीं अपना रोजगार खड़ा करने का फैसला किया। हल्दी, मिर्च और धनिया से शुरू हुआ उनका सफर आज ‘मांजी मसाले’ के नाम से पहचान बना चुका है और उत्पाद पौड़ी के साथ टिहरी, देहरादून समेत अन्य शहरों तक पहुंच रहे हैं।

शहर की नौकरी छोड़ गांव में खड़ा किया कारोबार

कोविड के दौरान गांव लौटे संजीव ने परिस्थितियों को अवसर में बदलने का फैसला किया। प्रधानमंत्री रोजगार योजना का लाभ लेकर उन्होंने मसाला यूनिट स्थापित की। शुरुआत में सीमित उत्पादों से शुरू हुआ कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया। आज यूनिट में हल्दी, मिर्च, धनिया, हरी और बड़ी इलायची, तेजपत्ता के साथ मंडुवा, झंगोरा और विभिन्न पहाड़ी दालों के उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।

आसपास के गांवों और क्षेत्रों से कच्चा माल जुटाकर उसकी सफाई, पिसाई और पैकिंग का काम यूनिट में ही किया जाता है। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने के साथ गांव में ही रोजगार की राह भी खुली है।

मसालों के साथ रोजगार भी बांट रहे संजीव

संजीव ने कारोबार को केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा। यूनिट में चार महिलाएं उत्पादन और मार्केटिंग से जुड़ी हैं, जबकि उत्पादों को अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने में तीन अन्य लोग सहयोग कर रहे हैं। उनकी पत्नी और बड़ा बेटा भी कारोबार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस तरह करीब आठ लोग प्रत्यक्ष रूप से इस स्वरोजगार गतिविधि से जुड़े हैं।

बेटे ने भी चुना गांव, पिता के कारोबार में जुटा

संजीव के बड़े बेटे अक्षत बछेती ने दिल्ली-एनसीआर में 12वीं तक पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर में नौकरी करने के बजाय उन्होंने गांव में रहकर पिता के कारोबार को आगे बढ़ाने का फैसला किया। अक्षत का कहना है कि माता-पिता के साथ गांव में रहकर काम करने में उन्हें खुशी मिलती है। उनका मानना है कि युवाओं को नौकरी के विकल्प के साथ अपने गांव में उपलब्ध स्वरोजगार की संभावनाओं पर भी विचार करना चाहिए।

घर की जिम्मेदारी के साथ रोजगार भी

यूनिट में काम करने वाली ग्रामीण महिलाएं भी गांव के नजदीक रोजगार मिलने से संतुष्ट हैं। कविता देवी और दीप्ति देवी करीब चार वर्षों से यूनिट से जुड़ी हैं। घरेलू कामकाज के बाद वे यूनिट पहुंचकर मसालों की सफाई, पिसाई और पैकिंग करती हैं। उनका कहना है कि घर के पास रोजगार मिलने से वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ काम कर पा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

35 फीसदी सब्सिडी से मिली कारोबार को उड़ान

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि संजीव बछेती ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत मसाला यूनिट स्थापित करने के लिए ऋण लिया था। योजना के तहत उन्हें 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला। वर्तमान में यूनिट बेहतर ढंग से संचालित हो रही है और उत्पादों की मांग पौड़ी के साथ अन्य जनपदों में भी है। जिला प्रशासन की ओर से उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के आधार पर स्वरोजगार खड़ा कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने वाले ऐसे प्रयास युवाओं के लिए प्रेरणादायी हैं।

सरकारी स्टॉलों से बढ़ी बाजार तक पहुंच

जिला प्रशासन की ओर से आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में लगाए जाने वाले स्टॉलों में संजीव को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे ‘मांजी मसाले’ को पहचान मिलने के साथ नए बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिली है। हल्दी, मिर्च और धनिया से शुरू हुआ कारोबार अब पहाड़ी मसालों, अनाज और दालों के उत्पादों तक विस्तार ले चुका है।

गांव में रहकर रोजगार पैदा करने का लक्ष्य

संजीव बछेती का लक्ष्य गांव में रहकर कारोबार को और विस्तार देना और अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना है। वे उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हैं और कहते हैं कि ग्राहकों का भरोसा उनके कारोबार की सबसे बड़ी पूंजी है।